Verse 1हैं प्रभु तेरे कृपास्थल में आता हु
तेरे चरणों में विश्राम,आनंद की भरपुरी
आराधना में तेरा मुह में देखता हु
गाता कितना विश्वायोग्य है तू
Verse 2कितना विश्वस्योग्य है तू
कितना विश्वस्थ
कितना विश्वस्योग्य है तू
सर्वस्व विश्वस्योग्य
Verse 3है दया का प्रभु मेरा पुकार सुन
आंधी में रोशनीगर
और रात का गीत बी तू
तेरे पंको के चावनी में
दिल का आव्हान सुन
गाता कितना विश्वस्योग्य है तू
Verse 4है प्रभु सारे शांति का श्रोता है तू
दिनों को दिलासा दू
तुझ से जो पाई है
तेरे प्रेम का गुण गावूँ
जब तक जिंदा रहु
गाता कितना विश्वस्योग्य है तू