Verse 1मैं अपनी आंखें उठाता हूं प्रभु
कलवरी के उस क्रूस की ओर (2)
मेरे लिए कुचला गया
मेरे लिए जिसने जान दी (2)
Verse 2तेरे चरणों को प्रेम से चूमने
तेरे ही पास आता हूं (2)
Verse 3आराधना यिशु की हो (2)
हालेलुया हालेलुया (2)
Verse 4मरूभूमि के इस सफर में प्रभु
अगुवाई देकर तू चला मुझको
मेरे पैरों को तू स्थिर कर दे
अपनी दया से मुझे थाम ले प्रभु
जंगली जैतून सा था मैं तूने
अपने साथ जोड़ा मुझको
Verse 5जितना धन्य कहूं वो भी, कम है प्रभु
जितनी स्तुति करूं वो भी, कम है प्रभु;
तेरे प्रेम को जब याद करूं
तेरी कृपा को जब याद करूं (2)
मैं कुछ भी नहीं ,मुझमें कुछ भी नहीं
सब तेरी दया है प्रभु आराधना…
Verse 6कुम्हार के हाथों में मिटटी हो जैसे
तेरी इच्छा मुझमें पूरी हो जाए
संसार में तेरी सेवा करने को
करता समर्पण यह जीवन अपना
टूटे हुए मन को मेरे
अपनी महिमा से भर दिया
Verse 7जितना धन्य कहूं वो भी, कम है प्रभु
जितनी स्तुति करूं वो भी, कम है प्रभु
तेरे प्रेम को जब याद करूं
तेरी कृपा को जब याद करूं (2)
मैं करता हूं अर्पण सबकुछ अपना
तेरे ही महिमा के लिए आराधना…